मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख और शुभ त्योहारों में से एक है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। मकर संक्रांति न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कृषि, प्रकृति और सामाजिक एकता से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति की तिथि और शुभ समय को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता है। इस ब्लॉग में हम मकर संक्रांति 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और भारत में इसके विविध रूपों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण काल में किए गए स्नान, दान और जप का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का महत्व
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजनों का विशेष महत्व होता है। तिल को पवित्र माना जाता है और यह शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। वहीं गुड़ आपसी मधुरता और सौहार्द का प्रतीक है।
इस दिन लोग एक-दूसरे को तिल-गुड़ देकर शुभकामनाएँ देते हैं, जो प्रेम, एकता और सकारात्मकता का संदेश देता है।
मकर संक्रांति 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन सूर्य दोपहर 3 बजकर 37 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
हालाँकि, 14 जनवरी 2026 को एकादशी तिथि होने के कारण कई स्थानों पर मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को भी मनाई जाएगी।
स्नान और दान के लिए 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाना अधिक शुभ और उत्तम माना गया है।
इसी दिन उत्तरायण और मकर संक्रांति का धार्मिक रूप से पालन करना श्रेष्ठ रहेगा।
भारत में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है?
भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है:
- पंजाब – लोहड़ी
- तमिलनाडु – पोंगल
- असम – बिहू
- गुजरात – उत्तरायण (पतंग उत्सव)
- महाराष्ट्र – तिलगुल संक्रांत
यह पर्व फसल पकने की खुशी और किसानों के परिश्रम का उत्सव भी है।
मकर संक्रांति का सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
मकर संक्रांति हमें दान, सेवा, एकता और भाईचारे का संदेश देती है। यह पर्व सिखाता है कि जैसे सूर्य अंधकार को पीछे छोड़ प्रकाश की ओर बढ़ता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में नकारात्मकता त्यागकर सकारात्मक मार्ग अपनाना चाहिए।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति 2026 केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत, आशा और समृद्धि का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने और समाज में प्रेम व सौहार्द फैलाने की प्रेरणा देता है।
आप सभी को मकर संक्रांति 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!