देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
समस्त ब्रह्मांड शक्ति के द्वारा संचालित होता है। शक्ति के बिना कोई भी जीव अपनी गतिविधियों को पूर्ण नहीं कर सकता। चर-अचर जीव-जंतु, पेड़-पौधे और प्रकृति की प्रत्येक गति में शक्ति का ही स्वरूप दिखाई देता है। जल, अग्नि, वायु और प्रकृति के अन्य तत्व भी इसी शक्ति का प्रतीक हैं।
मनुष्य भी अपने जीवन में विभिन्न कार्य अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार ही करता है। नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य आदि शक्ति माँ जगदम्बा की आराधना और उपासना करना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ दुर्गा की श्रद्धापूर्वक उपासना करने से भक्तों को शक्ति, सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

वर्ष में कितनी बार आती है नवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं:
- चैत्र नवरात्रि
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
- आश्विन शारदीय नवरात्रि
- माघ गुप्त नवरात्रि
इनमें चैत्र और आश्विन नवरात्रि गृहस्थ जीवन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। वहीं आषाढ़ और माघ मास में आने वाली नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जिनमें साधक विशेष साधना और अनुष्ठान करते हैं।
नवरात्रि में होती है नवदुर्गा की उपासना
‘नवरात्रि’ का अर्थ है नौ रातें। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इन नौ स्वरूपों को सामूहिक रूप से नवदुर्गा कहा जाता है।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप इस प्रकार हैं:
- माँ शैलपुत्री – नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा की जाती है।
- माँ ब्रह्मचारिणी – दूसरे दिन माँ के इस स्वरूप की आराधना होती है।
- माँ चंद्रघंटा – तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।
- माँ कूष्मांडा – चौथे दिन माँ कूष्मांडा की उपासना होती है।
- माँ स्कंदमाता – पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
- माँ कात्यायनी – छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना होती है।
- माँ कालरात्रि – सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है।
- माँ महागौरी – आठवें दिन माँ महागौरी की उपासना की जाती है।
- माँ सिद्धिदात्री – नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
इस प्रकार नवरात्रि के नौ दिनों में माँ जगदम्बा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना की जाती है।
भारत में अलग-अलग तरीके से होती है देवी की आराधना
नवरात्रि और दुर्गा पूजा भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी-अपनी परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार मनाई जाती है।
भारत के पूर्वी राज्यों, विशेषकर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। इन दिनों देवी की विशेष पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती के पाठ का आयोजन किया जाता है।
दुर्गा सप्तशती में माँ दुर्गा के पराक्रम, महिमा और स्तुति का वर्णन मिलता है। इसमें देवी की शक्ति और उनके विभिन्न स्वरूपों का विस्तृत वर्णन किया गया है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु श्रद्धा और विधि-विधान के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं।
2026 में दुर्गा पूजा और नवरात्रि की महत्वपूर्ण तिथियां
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होगी।
इस वर्ष आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 को रात्रि 09:19 बजे से 11 अक्टूबर 2026 को रात्रि 09:30 बजे तक रहेगी।
कलश स्थापना का शुभ समय:
11 अक्टूबर 2026, प्रातः 06:19 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
प्रमुख तिथियां
| पर्व | तिथि |
| नवरात्रि प्रारंभ / कलश स्थापना | 11 अक्टूबर 2026 |
| महासप्तमी | 17 एवं 18 अक्टूबर 2026 |
| महाअष्टमी | 19 अक्टूबर 2026 |
| महानवमी | 20 अक्टूबर 2026 |
| विजयादशमी / दशहरा | 21 अक्टूबर 2026 |
नोट: पूजा एवं शुभ मुहूर्त स्थान के अनुसार कुछ समय अलग हो सकते हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
नवरात्रि पूजा में उपयोगी सामग्री
नवरात्रि की पूजा के लिए भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार विभिन्न पूजन सामग्रियों का उपयोग करते हैं। सामान्य रूप से निम्न सामग्री उपयोगी मानी जाती है:
- रोली
- लाल फूल – विशेष रूप से गुड़हल
- सिंदूर
- अबीर
- फूलों की माला
- अक्षत (चावल)
- दीपक
- नैवेद्य / प्रसाद
- लाल चुनरी
- कर्पूर
- धूप
- दुर्गा सप्तशती की पुस्तक
नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना का संदेश
नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और आत्मविश्वास का पर्व भी है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करके भक्त अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने की कामना करते हैं।
माँ दुर्गा की आराधना हमें यह संदेश देती है कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना साहस, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करना चाहिए।
नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ जगदम्बा सभी भक्तों को शक्ति, सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें।
जय माता दी!